स्वागत (कविता)
स्वागत (कविता)
फूल खिले, मुस्कान बिखरे,
रोशनी आई, नभ में ठहरे।
बाहें फैलीं स्नेह लुटाएँ,
दिल की धड़कन गान सुनाएँ।
तारों ने जग में चमक जताई,
भोर की किरणें नई छटा लाई।
मित्र के बोल मन को छूते,
संग हवा जीवन को झूले।
रंग खिले मधुर मुस्कान,
कदम उठे आशा का गान।
स्नेह की छाया हृदय सँवारे,
मित्रता खिले जीवन में प्यारे।
जीआर कवियूर
27 09 2025
(कनाडा, टोरंटो)
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